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क्या है ब्रह्मचर्य

ब्रह्मचर्य क्या है?

ब्रह्मचर्य क्या है? वह पुदगलसार है। हम जो आहार खाते-पीते
हैं, उन सभी का सार क्या रहा? 'ब्रह्मचर्य'! वह सार
यदि आपका चला गया तो आत्मा को जिसका आधार है, वह
आधार ढीला हो जाएगा। इसलिए ब्रह्मचर्य मुख्य वस्तु है। एक
ओर ज्ञान हों और दूसरी ओर ब्रह्मचर्य हो तो सुख
की सीमा ही नहीं रहेगी! फिर ऐसा 'चेन्ज' (परिवर्तन)
हो जाए कि बात ही मत पूछिए! क्योंकि ब्रह्मचर्य
तो पुदगलसार है।
यह सब खाते हैं, पीते हैं, उसका क्या होता होगा पेट में?
प्रश्नकर्ता : रक्त होता है।
दादाश्री : उस रक्त का फिर क्या होता है?
प्रश्नकर्ता : रक्त से वीर्य होता है।
दादाश्री : ऐसा? वीर्य को समझता है? रक्त से वीर्य होगा,
उस वीर्य का फिर क्या होगा? रक्त की सात धातुएँ कहते हैं
न? उनमें एक से हड्डियाँ बनती है, एक से मांस बनता है, उनमें से
फिर अंत में वीर्य बनता है। आखरी दशा वीर्य होती है। वीर्य
पुदगलसार कहलाता है। दूध का सार घी कहलाता है, ऐसे
ही यह जो आहार ग्रहण किया उसका सार वीर्य
कहलाता है।
लोकसार मोक्ष है और पुदगलसार वीर्य है। संसार
की सारी चीज़ें अधोगामी हैं। वीर्य अकेला ही यदि चाहें
तो ऊर्ध्वगामी हो सकता है। इसलिए वीर्य
ऊर्ध्वगामी हो ऐसी भावना करनी चाहिए।

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ब्रह्मचर्य जीवन जीने के उपाय- शरीर के अन्दर विद्यमान ‘वीर्य’ ही जीवन शक्ति का भण्डार है। शारीरिक एवं मानसिक दुराचर तथा प्राकृतिक एवं अप्राकृतिक मैथुन से इसका क्षरण होता है। कामुक चिंतन से भी इसका नुकसान होता है। अत: बचने के कुछ सरल उपाय निम्रानुसार है- 1.ब्रह्मचर्य जीवन जीने के लिये सबसे पहले ‘मन’ का साधने की आवश्यकता है। अत: अन्नमय कोष की साधना करें। भोजन पवित्र एवं सादा होना चाहिए, सात्विक होना चाहिए। 2. कामुक चिंतन आने पर निम्र उपाय करें- * जिस प्रकार गन्ने का रस बाहर निकल जाने के पश्चात ‘छूछ’ कोई काम का नहीं रह जाता उसी प्रकार व्यक्ति के शरीर से ‘वीर्य’ के न रहने पर होता है, इस भाव का चिंतन करें। * तत्काल निकट के देवालय में चले जायें एवं कुछ देर वहीं बैठे रहें। * अच्छे साहित्य का अध्ययन करें। जैसे- ब्रह्मचर्य जीवन की अनिवार्य आवश्यकता, मानवी विद्युत के चमत्कार, मन की प्रचण्ड शक्ति, मन के हारे हार है मन के जीते जीत, हारिए न हिम्मत आदि। * अच्छे व्यक्ति के पास चले जायें। * आपके घर रिश्तेदार में रहने वाली महिला को याद करें कि मेरे घर में भी माता है, बहन है, बेटी है।...

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